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Bass test: टेस्ट टोन से सबवूफ़र, हेडफ़ोन और फ़ोन स्पीकर का बास चेक करें

झटपट bass test के लिए कम वॉल्यूम पर साइन टोन बजाएँ और धीरे-धीरे नीचे जाएँ: 100, 80, 60, 40 और 30 Hz। हेडफ़ोन और सबवूफ़र की आवाज़ 60 Hz से काफ़ी नीचे तक साफ़ रहनी चाहिए। फ़ोन स्पीकर की आवाज़ 200 Hz के आसपास ग़ायब हो जाना सामान्य है, यह ख़राबी नहीं है। अगर किसी एक फ़्रीक्वेंसी पर खड़खड़ाहट सबसे तेज़ हो, तो कुछ ढीला है; और अगर हर फ़्रीक्वेंसी पर भनभनाहट हो, तो स्पीकर में ही गंदगी या ख़राबी है।

दो मिनट का bass test

सबसे पहले ऑनलाइन टोन जनरेटर खोलें, साइन वेव चुनें और वॉल्यूम कम रखें। बास जाँचने के लिए गाने से बेहतर एक स्थिर साइन टोन है: इसमें बस एक ही पिच होती है, और कुछ नहीं। इसलिए कोई भी भनभनाहट, खड़खड़ाहट या आवाज़ का गिरना रिकॉर्डिंग से नहीं, बल्कि स्पीकर या कमरे से आता है।

100 Hz से शुरू करें, फिर एक-एक कदम नीचे जाएँ: 80, 60, 50, 40, 30 और 20 Hz। हर कदम पर ज़रूरत हो तभी वॉल्यूम थोड़ा बढ़ाएँ, और दो बातें नोट करें: किस फ़्रीक्वेंसी पर आवाज़ साफ़ तौर पर धीमी पड़ती है, और टोन के साथ कोई और शोर तो नहीं आ रहा। फिर धीरे-धीरे लगभग 200 Hz तक वापस ऊपर जाएँ। जो खड़खड़ाहट एक ही जगह आए और उसके दोनों तरफ़ ग़ायब हो जाए, वह रेज़ोनेंस है। आमतौर पर इसकी वजह कोई ढीली चीज़ होती है, ख़राब स्पीकर नहीं।

  • एक बार में एक ही डिवाइस टेस्ट करें, और शांत कमरे में।
  • फ़्रीक्वेंसी या वेवफ़ॉर्म बदलते समय हेडफ़ोन कानों से हटा लें।
  • साइन वेव पर ही रहें। स्क्वेयर और सॉटूथ वेव में हार्मोनिक्स जुड़ जाते हैं, वे कहीं ज़्यादा तेज़ सुनाई देती हैं और असली बास को छिपा देती हैं।

ठीक स्पीकर से क्या उम्मीद रखें

स्पीकर कितना नीचे तक बजेगा, यह उसके साइज़ पर निर्भर करता है, इसलिए एक ही टेस्ट अलग-अलग डिवाइस पर अलग नतीजे देता है। नतीजे को डिवाइस के हिसाब से परखें, इंसानी सुनने की निचली सीमा 20 Hz के हिसाब से नहीं।

  • फ़ोन और लैपटॉप स्पीकर: लगभग 200 Hz से नीचे बहुत कम आवाज़, और 100 Hz पर लगभग कुछ नहीं। यह फ़िज़िक्स है, ख़राबी नहीं। फ़ोन पर गहराई नहीं, बल्कि यह सुनें कि टोन साफ़ है और उसमें भनभनाहट नहीं है।
  • हेडफ़ोन और ईयरबड्स: अच्छी सील हो तो ये आमतौर पर 30 Hz या उससे नीचे तक पहुँच जाते हैं। ईयरबड्स में बास कमज़ोर लगे तो ज़्यादातर वजह ठीक से फ़िट न होना होती है, इसलिए ड्राइवर को दोष देने से पहले दूसरे साइज़ के ईयर टिप्स आज़माएँ।
  • छोटे Bluetooth स्पीकर: इनकी आवाज़ अक्सर 60 से 100 Hz के बीच कहीं कम होने लगती है। बड़े स्पीकर इससे नीचे तक जाते हैं।
  • सबवूफ़र: इसका काम लगभग 80 Hz से नीचे की रेंज है। ठीक सबवूफ़र को मध्यम वॉल्यूम पर 30–40 Hz साफ़ बजाना चाहिए, और कई इससे भी नीचे जाते हैं।

सबवूफ़र कैसे टेस्ट करें

40 Hz कम लेवल पर बजाएँ, फिर धीरे-धीरे वॉल्यूम बढ़ाएँ। हाथ को कोन या पोर्ट के पास रखें: आवाज़ मुश्किल से सुनाई दे तब भी हवा चलती महसूस होनी चाहिए। अगर कुछ भी न हिले, तो सबवूफ़र पर शक करने से पहले पावर, केबल, सबवूफ़र का अपना वॉल्यूम नॉब और रिसीवर, साउंडबार या कार स्टीरियो में Sub या LFE सेटिंग जाँचें।

इसके बाद 80 Hz से 30 Hz तक नीचे आएँ और टोन बजते समय कमरे में घूमें। अगर बास एक जगह गूँजता है और दूसरी जगह लगभग ग़ायब हो जाता है, तो यह सामान्य है: कमरा ख़ुद ही कम फ़्रीक्वेंसी को कहीं बढ़ाता है और कहीं काट देता है। किसी भी सेटिंग से ज़्यादा फ़र्क़ सबवूफ़र या अपनी बैठने की जगह बदलने से पड़ता है।

स्पीकर बनाने वाली कंपनी SVS के अनुसार 80 Hz सबसे आम क्रॉसओवर फ़्रीक्वेंसी है और THX स्टैंडर्ड भी यही है। अगर आपके रिसीवर ने ऑटोमैटिक सेटअप किया है, तो उसकी चुनी सेटिंग रहने दें। अगर आपने ख़ुद सेट किया है और क्रॉसओवर के आसपास आवाज़ उभरी हुई या खोखली लगती है, तो सबवूफ़र का लेवल तब तक एडजस्ट करें जब तक मेन स्पीकर और सबवूफ़र की आवाज़ आपस में घुल-मिल न जाए।

लेफ़्ट, राइट और बैलेंस सेटिंग जाँचें

अगर बास सिर्फ़ एक तरफ़ से आता लगे, तो अक्सर वजह कोई सेटिंग होती है, ख़राब स्पीकर नहीं। पहले लेफ़्ट और राइट स्पीकर टेस्ट चलाएँ। अगर हेडफ़ोन में एक तरफ़ आवाज़ धीमी है या आ ही नहीं रही, तो बैलेंस स्लाइडर और Mono Audio जाँचें।

iPhone पर Settings > Accessibility > Audio & Visual में जाएँ और Balance और Mono Audio देखें। Android पर Settings > Accessibility खोलें और ऑडियो एडजस्टमेंट वाला विकल्प ढूँढें, जहाँ आप बैलेंस बदल सकते हैं या दोनों चैनल को एक कर सकते हैं। नाम और मेन्यू हर कंपनी के फ़ोन में अलग हो सकते हैं।

खड़खड़ाहट, भनभनाहट या ख़ामोशी: नतीजे का क्या मतलब है

ज़्यादातर नतीजे इन पाँच में से किसी एक पैटर्न में आते हैं। कुछ भी ख़रीदने से पहले अपना नतीजा मिलाकर देखें।

  • सिर्फ़ एक फ़्रीक्वेंसी पर खड़खड़ाहट: कोई चीज़ रेज़ोनेट कर रही है। फ़ोन में अक्सर यह कवर या कोई ढीला ढक्कन होता है; कार में कोई पैनल या दरवाज़े की ट्रिम। टोन को उसी फ़्रीक्वेंसी पर रोककर अलग-अलग हिस्सों को दबाएँ, जब तक खड़खड़ाहट बंद न हो जाए।
  • फ़ोन स्पीकर में हर फ़्रीक्वेंसी पर भनभनाहट: आमतौर पर ग्रिल में रेशे, धूल या कचरा। देखें फ़ोन स्पीकर को सुरक्षित तरीक़े से कैसे साफ़ करें।
  • फ़ोन भीगने के बाद दबी हुई या चटचटाती आवाज़: हो सकता है ग्रिल में अब भी पानी हो। वॉटर इजेक्ट साउंड आज़माएँ और पढ़ें पानी के बाद स्पीकर क्यों खरखराता है।
  • सिर्फ़ तेज़ वॉल्यूम पर आवाज़ फटना: ज़्यादातर छोटे स्पीकर सबसे पहले बास में अपनी सीमा तक पहुँचते हैं। वॉल्यूम कम करें; यह कोई ख़राबी नहीं है।
  • किसी भी फ़्रीक्वेंसी पर आवाज़ नहीं: वॉल्यूम, म्यूट, Bluetooth और आउटपुट सेटिंग्स से शुरू करें। स्पीकर से आवाज़ न आने पर हमारी गाइड इन्हें क्रम से बताती है।

Wring के साथ फ़ोन पर bass test

ब्राउज़र सिर्फ़ फ़ोन के सामान्य स्टीरियो आउटपुट का इस्तेमाल कर सकता है। वह ख़ुद से ईयरपीस या नीचे वाला स्पीकर नहीं चुन सकता। iPhone और Android के लिए Wring ऐप में एक स्पीकर टेस्ट है जो संगत फ़ोन पर स्पीकरों को अलग-अलग या एक साथ बजाता है। इसके साथ टोन जनरेटर और dB मीटर भी हैं, और ग्रिल गीली या धूल भरी हो तो Water Eject और Dust Clean भी।

Wring विज्ञापनों और इस्तेमाल की सीमाओं के साथ फ़्री है; Pro दोनों हटा देता है।

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क्या न करें

एक जैसी टेस्ट टोन उसी लेवल के संगीत से ज़्यादा कानों को थकाती है, और बास असल से धीमा महसूस होता है। अमेरिकन स्पीच-लैंग्वेज-हियरिंग एसोसिएशन (ASHA) चेतावनी देता है कि 85 dBA की आवाज़ लगभग 8 घंटे में सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँचा सकती है, और इससे तेज़ आवाज़ यह नुकसान और जल्दी करती है।

  • फ़ुल वॉल्यूम पर टेस्ट न करें। कम से शुरू करें और लेवल उतना ही बढ़ाएँ जितने में टोन सुनाई दे।
  • टोन बजते समय फ़ोन स्पीकर को कान से सटाकर न रखें।
  • सबवूफ़र को ऐसे लेवल पर न चलाएँ जहाँ खटखट, थप-थप या ज़ोरदार धमक सुनाई दे। इसका मतलब है कि कोन अपनी सीमा से टकरा रहा है, और इससे ड्राइवर ख़राब हो सकता है।
  • छोटे स्पीकर पर गहरी टोन को कई मिनट तक लूप में न बजाएँ। एक छोटा टेस्ट ही सब कुछ बता देता है।

रिपेयर शॉप कब ले जाएँ

डिवाइस की जाँच कराएँ अगर ध्यान से सफ़ाई करने और सुखाने के बाद भी फ़ोन स्पीकर हर फ़्रीक्वेंसी पर भनभनाता है, अगर कम वॉल्यूम पर भी स्पीकर से रगड़ जैसी आवाज़ आती है, या अगर सबवूफ़र में पावर है और केबल व सेटिंग्स ठीक हैं, फिर भी किसी फ़्रीक्वेंसी पर कुछ नहीं बजता। रगड़ खाती वॉइस कॉइल या फटा कोन किसी आवाज़ से ठीक नहीं हो सकता। अगर फ़ोन अभी वारंटी में है, तो कुछ भी खोलने से पहले Apple या अपने फ़ोन की कंपनी से संपर्क करें।

झटपट जवाब

Bass test के लिए कौन-सी फ़्रीक्वेंसी अच्छी है? सबवूफ़र के लिए 40 Hz, और हेडफ़ोन व Bluetooth स्पीकर के लिए 60–100 Hz। फ़ोन स्पीकर के लिए लगभग 100 से 300 Hz तक स्वीप करें और गहराई नहीं, भनभनाहट पर ध्यान दें।

मुझे 20 Hz सुनाई क्यों नहीं देता? ज़्यादातर स्पीकर इसे काम लायक लेवल पर बजा ही नहीं पाते, और बहुत से लोग 20 Hz को सुनने से ज़्यादा महसूस करते हैं। यह सामान्य है।

क्या bass test से मेरे स्पीकर ख़राब हो सकते हैं? मध्यम वॉल्यूम पर नहीं। नुकसान लंबे समय तक तेज़ लेवल पर बजाने से होता है, ख़ासकर छोटे स्पीकर पर गहरी टोन के साथ।

क्या ऑनलाइन फ़्री bass test है? हाँ: टोन जनरेटर आपके ब्राउज़र में 20 Hz से 20 kHz तक कोई भी फ़्रीक्वेंसी बजाता है, कुछ भी इंस्टॉल किए बिना।

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