ब्लॉग

Hearing test frequency: जानें आप सबसे ऊँची कौन-सी टोन सुन सकते हैं

वायर वाले हेडफ़ोन लगाएँ, आवाज़ कम रखें, साइन टोन चलाएँ और फ़्रीक्वेंसी तब तक बढ़ाएँ जब तक टोन ग़ायब न हो जाए। जो आख़िरी टोन आपको सुनाई दे, वही आपकी सुनने की ऊपरी सीमा है। युवा कान अक्सर 17 kHz या उससे ऊपर तक सुनते हैं; उम्र के साथ यह सीमा धीरे-धीरे घटती है, और यह सामान्य है। यह जाँच ऑडियोग्राम की जगह नहीं लेती: एक कान में अचानक सुनाई कम होना, कान में घंटी जैसी आवाज़ या बातचीत समझने में दिक्कत हो तो किसी विशेषज्ञ से मिलें।

दो मिनट में हियरिंग फ़्रीक्वेंसी टेस्ट कैसे करें

बस एक शांत कमरा, हेडफ़ोन और एक टोन जनरेटर चाहिए। मुफ़्त ऑनलाइन टोन जनरेटर खोलें, साइन वेव चुनें और ये स्टेप्स अपनाएँ।

पूरे टेस्ट में वॉल्यूम एक जैसा रखें। अगर हर बार टोन धीमी पड़ने पर आप आवाज़ बढ़ाते हैं, तो आप यह नाप रहे हैं कि हेडफ़ोन कितनी तेज़ बज सकते हैं, यह नहीं कि आप कितनी ऊँची फ़्रीक्वेंसी सुन सकते हैं।

  • वायर वाले हेडफ़ोन या अच्छे ईयरबड्स इस्तेमाल करें। सबसे ऊँची टोन के लिए फ़ोन का स्पीकर अच्छा विकल्प नहीं है (इस पर नीचे और बात है)।
  • 1 kHz से शुरू करें और वॉल्यूम ऐसा रखें कि टोन साफ़ सुनाई दे पर धीमी हो, लगभग धीमी बातचीत जितनी।
  • सीधे 8 kHz पर जाएँ, फिर क़दम-दर-क़दम ऊपर बढ़ें: 10, 12, 14, 15, 16, 17 kHz और आगे।
  • जो आख़िरी फ़्रीक्वेंसी अब भी सुनाई दे, उसे लिख लें। फिर उससे ऊपर से शुरू करके नीचे आएँ, जब तक टोन वापस सुनाई न दे। दोनों संख्याएँ आसपास होनी चाहिए।
  • एक बार में एक कान जाँचें: एक ही ईयरबड लगाएँ या स्पीकर टेस्ट के लेफ़्ट/राइट बटन इस्तेमाल करें।
App Store से डाउनलोड करें Google Play पर पाएं

आपके नतीजे का मतलब

किताबों के मुताबिक़ इंसान लगभग 20 Hz से 20 kHz तक सुनता है, लेकिन 20 kHz वाला सिरा ज़्यादातर बच्चों और किशोरों का होता है। उम्र के साथ ऊपरी सीमा थोड़ी-थोड़ी नीचे खिसकती है। उम्र से जुड़ी सुनने की कमी ऊँची आवाज़ों से शुरू होती है और दोनों कानों पर असर डालती है, इसीलिए फ़्रीक्वेंसी टेस्ट उसे सबसे पहले पकड़ता है।

इस संख्या को एक मोटा-मोटा अंदाज़ा मानें। 20 और 30 की उम्र के कई लोग 17 kHz के आसपास की आवाज़ अब नहीं सुन पाते, और आने वाले दशकों में सीमा और नीचे आती रहती है। अगर दोनों कान लगभग एक ही जगह रुकते हैं और रोज़ की बातचीत आसानी से समझ आती है, तो सिर्फ़ कम सीमा चिंता की बात नहीं है।

ज़्यादा अहम है दोनों कानों में फ़र्क़ या कोई बदलाव जो आप ख़ुद महसूस करें। अगर एक कान दूसरे से कई किलोहर्ट्ज़ पहले रुक जाता है, तो दूसरे हेडफ़ोन से टेस्ट दोहराएँ। फ़र्क़ बना रहे तो डॉक्टर या ऑडियोलॉजिस्ट को बताएँ।

मॉस्किटो साउंड: टीनएजर्स को सुनाई देता है, बड़ों को क्यों नहीं

मॉस्किटो साउंड (मच्छर जैसी आवाज़) बहुत ऊँची टोन का उपनाम है, लगभग 17 kHz। यह इसलिए मशहूर हुआ क्योंकि कई टीनएजर्स को यह चुभती हुई भिनभिनाहट जैसा सुनाई देता है, जबकि कई बड़ों को कुछ भी सुनाई नहीं देता। यह ऊपर बताया गया उम्र का वही असर है, बस एक फ़्रीक्वेंसी में।

ख़ुद आज़माएँ: टोन जनरेटर को धीमी आवाज़ पर 17,400 Hz पर सेट करें। कुछ सुनाई न दे तो पहले 15 kHz चलाकर देखें कि आपके हेडफ़ोन इतनी ऊँची टोन बजा भी पाते हैं या नहीं। टोन पकड़ने के लिए वॉल्यूम न बढ़ाएँ।

फ़ोन ग़लत जवाब क्यों दे सकता है

नतीजा उतना ही भरोसेमंद है जितना टोन बजाने वाला डिवाइस। फ़ोन के छोटे स्पीकर और सस्ते ईयरबड्स अक्सर 15 kHz से ऊपर की आवाज़ दबा देते हैं, और कुछ ब्लूटूथ कनेक्शन रेंज के सबसे ऊपरी हिस्से को कंप्रेस कर देते हैं या काट देते हैं। ऐसे में टोन इसलिए रुकती है कि हार्डवेयर रुक गया, आपके कान नहीं।

अगर टोन ज़रूरत से ज़्यादा जल्दी ग़ायब हो जाए, तो वायर वाले हेडफ़ोन या दूसरी जोड़ी आज़माएँ। फ़ोन का स्पीकर कमज़ोर या ख़राब तो नहीं, यह जानने के लिए स्पीकर टेस्ट चलाएँ और दोनों चैनलों की तुलना करें। हमारी बेस टेस्ट गाइड रेंज के दूसरे सिरे के बारे में है।

Wring ऐप में iPhone और Android के लिए टोन जनरेटर है, ताकि आप ब्राउज़र के बिना फ़ोन पर ही यह जाँच दोहरा सकें। यह विज्ञापनों और सीमाओं के साथ मुफ़्त है; Pro दोनों हटा देता है।

App Store से डाउनलोड करें Google Play पर पाएं

क्या न करें

हियरिंग फ़्रीक्वेंसी टेस्ट जल्दी हो जाता है और धीमी आवाज़ पर बिल्कुल सुरक्षित है। ये आदतें छोड़ें:

  • धीमी पड़ती ऊँची टोन सुनने के लिए वॉल्यूम न बढ़ाएँ। ऊँची फ़्रीक्वेंसी तब तक धीमी लग सकती है जब तक वह अचानक चुभने न लगे।
  • इस टेस्ट के लिए स्क्वेयर या सॉटूथ वेव न चुनें। ये अतिरिक्त टोन जोड़ती हैं और उसी वॉल्यूम पर कहीं ज़्यादा कर्कश लगती हैं।
  • लंबे सेशन न करें। कुछ मिनट काफ़ी हैं; लगातार बजती टोन थका देती है।
  • बच्चों या पालतू जानवरों को तेज़ ऊँची टोन न सुनाएँ, और इसे मज़ाक़ के तौर पर इस्तेमाल न करें।
  • नतीजे को डायग्नोसिस न समझें। यह आपकी ऊपरी सीमा दिखाता है, यह नहीं कि आप बातचीत कितनी अच्छी तरह सुनते हैं।

यह जाँच बनाम असली हियरिंग टेस्ट

ऑनलाइन फ़्रीक्वेंसी टेस्ट एक सवाल का जवाब देता है: आपकी सुनने की क्षमता कहाँ रुकती है? क्लिनिकल हियरिंग टेस्ट, जिसे ऑडियोग्राम कहते हैं, दूसरा सवाल पूछता है: कोई फ़्रीक्वेंसी कितनी धीमी होने पर आपको सुनाई देना बंद हो जाती है? यही बोलचाल वाली रेंज में सुनने की कमी को पकड़ता है।

अगर आपके पास AirPods Pro 2 या AirPods Pro 3 और iPhone या iPad है, तो Apple का हियरिंग टेस्ट फ़ीचर लगभग पाँच मिनट लेता है और अलग-अलग फ़्रीक्वेंसी पर आपकी सुनने की क्षमता डेसिबल हियरिंग लेवल (dBHL) में दिखाता है। यह 18 साल और उससे ज़्यादा उम्र के वयस्कों के लिए है। वरना कोई ऑडियोलॉजिस्ट पूरा टेस्ट कर सकता है।

डॉक्टर या ऑडियोलॉजिस्ट को कब दिखाएँ

अचानक सुनाई कम होना, अक्सर एक कान में, मेडिकल इमरजेंसी है: ठीक होने का इंतज़ार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।

कान में घंटी, भिनभिनाहट या सीटी जैसी आवाज़ जो किसी और को सुनाई न दे, उसे टिनिटस कहते हैं। शुरुआत अपने फ़ैमिली डॉक्टर या जनरल फ़िज़िशियन से करें, जो आपको ईएनटी विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।

अगर आप बार-बार लोगों से बात दोहराने को कहते हैं या टीवी की आवाज़ बढ़ाते हैं, तो हियरिंग चेकअप करवाएँ। शोर वह वजह है जिसे आप रोक सकते हैं: 70 dBA या उससे कम की आवाज़ों से सुनने को नुक़सान की संभावना कम है, जबकि 85 dBA या उससे ज़्यादा में लंबे समय तक या बार-बार रहना नुक़सान पहुँचा सकता है। फ़ोन पर डेसिबल मीटर से अंदाज़ा मिलता है कि आपका दिन कितना शोरभरा है।

झटपट जवाब

लोग जो सवाल सबसे ज़्यादा सर्च करते हैं, उनके छोटे जवाब।

  • मुझे कितनी फ़्रीक्वेंसी तक सुनाई देना चाहिए? युवा अक्सर लगभग 17 से 20 kHz तक सुनते हैं। बड़ों की सीमा आम तौर पर नीचे होती है और उम्र के साथ धीरे-धीरे घटती रहती है।
  • मॉस्किटो साउंड की फ़्रीक्वेंसी कितनी होती है? लगभग 17 kHz। कई टीनएजर्स इसे सुनते हैं; कई बड़े नहीं सुन पाते।
  • क्या फ़ोन पर hearing test हो सकता है? हेडफ़ोन और टोन जनरेटर से आप अपनी ऊपरी फ़्रीक्वेंसी सीमा जाँच सकते हैं। असली हियरिंग टेस्ट के लिए क्लिनिकल रूप से बनाया गया टेस्ट इस्तेमाल करें या विशेषज्ञ से मिलें।
  • मुझे टोन सिर्फ़ एक कान में क्यों सुनाई देती है? पहले हेडफ़ोन बदलकर दोबारा देखें। फ़र्क़ बना रहे तो अपनी सुनने की जाँच करवाएँ।
  • क्या हियरिंग फ़्रीक्वेंसी टेस्ट सुरक्षित है? हाँ, धीमी आवाज़ पर और कुछ मिनटों के लिए। जो टोन सुनाई नहीं देती, उसके पीछे कभी वॉल्यूम न बढ़ाएँ।

स्रोत